महेश्वर रोड पर पत्राचार, लेकिन काटकूट फाटा से बड़वाह तक मौत को दावत देता सफर; जलभराव ने बढ़ाया हादसों का खतरा
बड़वाह | लोकेश कोचले | The India Speaks
मानसून की शुरुआत हुए करीब 15 दिन बीत चुके हैं। लगातार बारिश के बीच बड़वाह क्षेत्र की प्रमुख सड़कों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढे बारिश के पानी से लबालब भरे हुए हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए सड़क पर गड्ढों का अंदाजा लगाना तक मुश्किल हो गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सड़कें पूरी तरह जलमग्न हैं और पेंचवर्क करना भी तकनीकी रूप से संभव नहीं है, तब नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा अब सड़क मरम्मत की मांग उठाने से तत्काल राहत कैसे मिलेगी?
हाल ही में नगर पालिका अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने महेश्वर रोड की मरम्मत के लिए कलेक्टर एवं एमपीआरडीसी को पत्र लिखा है। हालांकि क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि समस्या केवल महेश्वर रोड तक सीमित नहीं है। काटकूट फाटा से लेकर बड़वाह नगर तक की मुख्य सड़क भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कई स्थानों पर हालात ऐसे हैं कि सड़क में गड्ढे नहीं, बल्कि गड्ढों में सड़क दिखाई देती है।


काटकूट फाटा बना सबसे बड़ा हादसा जोन
सबसे चिंताजनक स्थिति काटकूट फाटा तिराहे पर है। यह क्षेत्र पहले से ही भारी यातायात वाला मार्ग है, जहां इंदौर की ओर से आने-जाने वाले भारी वाहन लगातार गुजरते हैं। वहीं काटकूट और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोग भी प्रतिदिन इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।
बारिश के कारण गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई दिखाई नहीं देती, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
जल निकासी की विफलता ने बढ़ाई परेशानी
स्थिति को और गंभीर बना रही है जल निकासी की अपर्याप्त व्यवस्था। सड़क पर जमा पानी गड्ढों को पूरी तरह ढक देता है, जिससे चालक अनजाने में सीधे उनमें उतर जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
अलका पार्क कॉलोनी के सामने जलभराव आज भी बना समस्या
काटकूट फाटा के आगे अलका पार्क कॉलोनी के सामने जलभराव की समस्या भी लगातार बनी हुई है। यह स्थान पहले भी चर्चा में रहा है, जहां स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि यहां मौजूद पुलिया को हटाने के बाद जल निकासी की व्यवस्था प्रभावित हो गई। परिणामस्वरूप हर बारिश में यहां पानी भर जाता है और आवागमन प्रभावित होता है।
सवाल जिम्मेदारो से
मानसून हर वर्ष आता है और सड़कें भी हर वर्ष इसी तरह टूटती हैं। सवाल यह है कि क्या हर बार केवल पत्राचार ही समाधान रहेगा, या फिर जिम्मेदार विभाग बारिश खत्म होने का इंतजार करने के बजाय स्थायी और टिकाऊ सड़क निर्माण की दिशा में भी ठोस कदम उठाएंगे?












