DWGS के उत्पादन, परिवहन और विक्रय को लेकर उठे सवाल; पशु आहार की गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच जरूरी
बड़वाह। ग्राम खोड़ी स्थित शराब फैक्ट्री से निकलने वाली DWGS यानी गीली भूसी को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर व्यापारी इसके उत्पादन, परिवहन और विक्रय की व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि DWGS से संबंधित निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय अथवा खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन होता है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी और कार्रवाई कब होगी?
DWGS के उत्पादन और निपटान से जुड़ी व्यवस्था में नियमों का पालन करना संबंधित इकाइयों की जिम्मेदारी है। यदि सक्षम प्राधिकारी की जांच में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो लागू कानूनों और लाइसेंस की शर्तों के अनुसार आर्थिक दंड, सुधारात्मक कार्रवाई या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
असुरक्षित पशु आहार मिला तो बढ़ सकती है मुश्किल
DWGS का उपयोग पशु आहार के रूप में किए जाने के कारण इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय है। यदि किसी अधिकृत जांच या प्रयोगशाला परीक्षण में यह साबित होता है कि उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा या पशु आहार संबंधी मानकों के अनुरूप नहीं है अथवा उसमें हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई संभव है।
हालांकि, किसी व्यक्ति या संस्था पर जुर्माना अथवा कारावास जैसी कार्रवाई तभी कही जा सकती है जब संबंधित कानून के तहत आवश्यक जांच, साक्ष्य और प्रक्रिया पूरी हो तथा उल्लंघन प्रमाणित हो।
अब सबसे बड़ा सवाल—जांच कौन करेगा?
DWGS को लेकर लगातार सामने आ रहे विवाद के बीच प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
- क्या DWGS के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच कराई गई?
- क्या उत्पाद की गुणवत्ता की प्रयोगशाला में जांच हुई?
- क्या इसके उत्पादन और परिवहन की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है?
- क्या पशु आहार के रूप में उपयोग किए जाने वाले DWGS के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन हो रहा है?
- यदि कोई अनियमितता सामने आई, तो अब तक कितनी कार्रवाई की गई?
- नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदारी फैक्ट्री, परिवहनकर्ता, विक्रेता या अन्य संबंधित पक्षों में से किसकी तय होगी?
कागजी रिकॉर्ड और लैब रिपोर्ट से खुलेगा राज
DWGS विवाद में आरोप-प्रत्यारोप के बजाय प्रशासनिक रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज, लाइसेंस की शर्तें, निरीक्षण रिपोर्ट और अधिकृत प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती हैं।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ लागू कानून और लाइसेंस की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि जांच में DWGS निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया जाता है, तो विवाद से जुड़े कई सवालों का जवाब भी मिल सकता है।
अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन इस मामले को केवल विवाद मानकर छोड़ता है या DWGS की गुणवत्ता, उत्पादन, परिवहन और विक्रय व्यवस्था की विस्तृत जांच कराकर पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करता है।












