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खरगोन। लोकेश कोचले द इंडिया स्पीक्स

जिले के नगरीय निकायों में चल रही विकास योजनाओं और नागरिक सेवाओं की जमीनी प्रगति की समीक्षा में कई ऐसे मामले सामने आए, जिन पर प्रशासन को सख्त निर्देश जारी करने पड़े। अमृत योजना के कामों में अत्यंत धीमी प्रगति, पीएम स्वनिधि में अपेक्षाकृत कम उपलब्धि, वित्तीय वर्ष के पांच महीने बीतने के बाद भी कम राजस्व वसूली और 300 से 500 दिन से अधिक समय से लंबित सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों ने नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागृह में कलेक्टर गुरु प्रसाद की अध्यक्षता में जिले के नगरीय निकायों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य नगरपालिका अधिकारी, मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट विभाग के अधिकारी और विभिन्न योजनाओं से जुड़े संविदाकार मौजूद रहे। कलेक्टर ने विकास एवं हितग्राहीमूलक योजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्धारित समय-सीमा में काम पूरे करने के निर्देश दिए।

अमृत योजना के काम बेहद धीमे, सुधार नहीं हुआ तो ठेकेदार पर कार्रवाई

अमृत योजना के तहत जल प्रदाय योजनाओं की समीक्षा के दौरान कसरावद क्षेत्र में संबंधित कार्यों की गति अत्यंत धीमी पाई गई। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट विभाग को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।

इतना ही नहीं, कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यदि कार्यों में अपेक्षित सुधार नहीं होता है तो संबंधित संविदाकार को नोटिस जारी कर उसे ब्लैकलिस्ट किए जाने की अनुशंसा राज्य शासन को भेजी जाए।

यह स्थिति अपने आप में सवाल खड़ा करती है कि जिन जल प्रदाय योजनाओं से नागरिकों को बेहतर सुविधा मिलनी है, उनके काम समय पर क्यों नहीं बढ़ पा रहे हैं और निर्माण की धीमी गति का खामियाजा आखिर जनता को कब तक भुगतना पड़ेगा?

पांच महीने बीते, फिर भी राजस्व वसूली बेहद कम

नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण मुद्दा समीक्षा में सामने आया। कलेक्टर ने कम राजस्व वसूली पर नाराजगी जताई।

प्रेस नोट के अनुसार वित्तीय वर्ष के पांच महीने बीत जाने के बावजूद निकायों की राजस्व वसूली अत्यंत कम है। कलेक्टर ने सभी मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को राजस्व वसूली बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

हालांकि बैठक में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि प्रत्येक नगरीय निकाय का निर्धारित राजस्व लक्ष्य कितना था और अब तक कितनी राशि वसूल की गई है। ऐसे में सवाल यह भी है कि राजस्व वसूली की वास्तविक स्थिति क्या है और लक्ष्य की तुलना में निकाय कितने पीछे हैं?

500 दिन से ज्यादा पुरानी शिकायतें भी नहीं सुलझीं!

नागरिकों की शिकायतों के निराकरण को लेकर भी समीक्षा बैठक में गंभीर स्थिति सामने आई। नगरीय निकायों में 300 और 500 दिवस से अधिक समय से लंबित सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों की समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने ऐसे सभी प्रकरणों का प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए और परियोजना अधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी।

लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है—जिस शिकायत के निराकरण के लिए नागरिक सीएम हेल्पलाइन का सहारा लेता है, वह शिकायत 300 या 500 दिन से ज्यादा समय तक लंबित कैसे रह जाती है?

यदि शिकायतों के निराकरण के लिए लगातार समीक्षा और निगरानी की व्यवस्था है, तो इतने लंबे समय तक प्रकरणों का लंबित रहना निश्चित तौर पर व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।

पीएम स्वनिधि में कम प्रगति, 15 दिन का अल्टीमेटम

पीएम स्वनिधि योजना की समीक्षा में भी जिले की अपेक्षाकृत कम प्रगति सामने आई। कलेक्टर ने सभी मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को अगले 15 दिनों में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

काम में अपेक्षित प्रगति नहीं करने वाले सामुदायिक संगठकों के खिलाफ अगले माह का वेतन रोकने की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

योजना का उद्देश्य जरूरतमंद स्ट्रीट वेंडर्स तक सहायता पहुंचाना है। ऐसे में सवाल यह है कि योजना की गति कम रहने से कितने पात्र हितग्राही अभी भी लाभ से दूर हैं।

महेश्वर में आवास अधिक लंबित, जल्द पूरा करने के निर्देश

प्रधानमंत्री आवास योजना-1.0 के तहत प्रगतिरत आवासों को मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान की अवधि में पूरा कराने के निर्देश दिए गए। नगर परिषद महेश्वर में प्रगतिरत आवासों की संख्या अधिक पाए जाने पर कलेक्टर ने सीएमओ को विशेष प्राथमिकता के साथ निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने को कहा।

वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 में पोर्टल पर लंबित पात्र हितग्राहियों की जांच कर डीपीआर का अनुमोदन कराने और उसे पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए।

समग्र ई-केवाईसी भी लंबित, अब शिविर और डोर-टू-डोर सर्वे

नगरीय निकायों में लंबित समग्र ई-केवाईसी को पूरा करने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए शिविर लगाने और जरूरत के अनुसार डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से सत्यापन कराने को कहा गया।

कलेक्टर ने कहा कि समग्र आईडी के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है, इसलिए ई-केवाईसी का कार्य मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत प्राथमिकता से पूरा किया जाए।

विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल, अब जिम्मेदारी तय करने की तैयारी

बैठक में सामने आए मुद्दों को देखें तो तस्वीर सिर्फ एक योजना तक सीमित नहीं है। कहीं अमृत योजना की गति अत्यंत धीमी है, कहीं राजस्व वसूली कम है, कहीं हितग्राही योजनाओं की प्रगति अपेक्षित नहीं है और कहीं नागरिकों की शिकायतें 300 से 500 दिन से अधिक समय से लंबित हैं।

प्रशासन ने अब अधिकारियों को समय-सीमा में काम पूरा करने और लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। अमृत योजना में सुधार नहीं होने पर संविदाकार को ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा और पीएम स्वनिधि में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर सामुदायिक संगठकों का वेतन रोकने के निर्देश इसी सख्ती का संकेत हैं।

अब बड़ा सवाल यही है कि बैठकों में दिए गए निर्देशों के बाद नगरीय निकायों के कामकाज में जमीनी स्तर पर कितनी तेजी आती है? अगली समीक्षा में क्या लंबित शिकायतों, कम राजस्व वसूली और धीमी विकास योजनाओं की तस्वीर बदलेगी या फिर एक और समीक्षा बैठक में इन्हीं समस्याओं पर नए निर्देश जारी होंगे?

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