भोपाल। मध्यप्रदेश में धान खरीदी और परिवहन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच का दायरा बड़ा होता दिखाई दे रहा है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने हाईकोर्ट को बताया है कि इस मामले में प्रदेशभर में 90 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। EOW ने कोर्ट के सामने अब तक की कार्रवाई और जांच की स्थिति भी रखी है।
90 FIR के बाद जांच के दायरे पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान धान के परिवहन और उससे जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा सामने आया। याचिका में जबलपुर से जुड़े मामले में करीब 34 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का उल्लेख किया गया है।
मामले में आरोप है कि धान के परिवहन से संबंधित दस्तावेजों में दर्ज वाहनों और वास्तविक परिवहन क्षमता के बीच गंभीर विसंगतियां थीं। जांच के दौरान ऐसे रिकॉर्ड का भी उल्लेख हुआ, जिनमें बड़ी मात्रा में धान के परिवहन के लिए दोपहिया वाहन, ऑटो और यात्री बस जैसे वाहनों का इस्तेमाल दर्ज बताया गया।
10 से 200 क्विंटल तक धान, वाहनों के रिकॉर्ड ने खड़े किए सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ रिकॉर्ड में 10 से 200 क्विंटल तक धान के परिवहन के लिए ऐसे वाहनों के नंबर दर्ज होने की बात सामने आई है, जिनकी क्षमता इतनी बड़ी मात्रा में धान ले जाने के लिहाज से सवाल खड़े करती है।
अब जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि दस्तावेजों में दर्ज परिवहन वास्तव में हुआ था या नहीं, संबंधित वाहनों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितता हुई।
43 करोड़ के अलग मामले से भी जुड़ा है धान परिवहन विवाद
इससे पहले हाईकोर्ट में धान परिवहन से जुड़ी करीब 43 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का एक अलग मामला भी सामने आया था, जिसमें कई जिलों में जांच का मुद्दा उठा था।
हालांकि, 90 FIR वाला ताजा EOW अपडेट और 43 करोड़ रुपये वाला मामला अलग न्यायिक कार्यवाहियों से संबंधित बताए गए हैं। इसलिए दोनों मामलों की रकम को जोड़कर एक ही घोटाले की राशि बताना उचित नहीं होगा।
अब निगाह इस बात पर है कि दर्ज 90 FIR में जांच आगे बढ़ने के बाद कितनी अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज धान परिवहन की वास्तविकता क्या सामने आती है।








