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करोड़ों के अपशिष्ट मुनाफे के आगे अंधा प्रशासन? सड़कों पर घूमता खतरनाक वेस्ट और ‘कुछ नहीं दिखने’ का दावा

बडवाह/खरगोन। The India Speaks Desk

शराब और एथेनॉल निर्माण इकाइयों से निकलने वाला DWGS (Distillers Wet Grains with Solubles) आज एक गंभीर बहस का विषय बन चुका है। इसे अक्सर “उप-उत्पाद” बताकर सामान्य दिखाने की कोशिश की जाती है, लेकिन जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) स्वयं इस पर आपत्ति जता चुका है और Zero Liquid Discharge (ZLD) नीति लागू है, तब यह सवाल उठना लाज़िमी है कि DWGS वास्तव में क्या है और इसे पशु आहार के रूप में क्यों नहीं खिलाया जाना चाहिए?

जानिए क्या है DWGS?

DWGS शराब निर्माण प्रक्रिया के बाद बचा हुआ वह अत्यधिक नमी युक्त जैविक अपशिष्ट है, जिसमें 60–70 प्रतिशत तक नमी होती है। इसमें अत्यधिक BOD (Biological Oxygen Demand) और COD (Chemical Oxygen Demand) पाया जाता है।


यह बहुत तेजी से सड़ने (Putrescible) वाला पदार्थ है।
डिस्टिलरी प्रक्रिया में अल्कोहल अलग करने के बाद जो गाढ़ा अवशेष बचता है, उसी से DWGS बनता है। यही कारण है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसे कई मामलों में High Pollution Load Waste मानता है।

यदि यह खुले में फेंका जाए या बारिश में बह जाए तो:
जल स्रोतों की ऑक्सीजन समाप्त हो जाती है
नाले, तालाब और भूजल जहरीले हो जाते हैं
जलीय जीवन पूरी तरह नष्ट हो सकता है

इसके अलावा इसमें तेज़ सड़न और जहरीली गैसें होती है।DWGS 24–48 घंटे में दोबारा फर्मेंट होने लगता है जिससे यह अमोनिया, मीथेन और सल्फर गैस छोड़ता है जिसके परिणामस्वरूप आसपास के गांवों में दुर्गंध और बीमारी फैलाता है।
इसी कारण Pollution Control Board इसे “Putrescible & Objectionable Waste” मानता है।

इसके अलावा स्थानीय स्तर पर शराब कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों द्वारा यह आरोप सामने आए हैं कि फर्मेंटेशन के दौरान कृषि-उपयोग वाली खाद या यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है।
यदि ऐसा है, तो उसका अवशेष DWGS में जाता है जिससे इसमें नाइट्रोजन और अमोनिया की मात्रा बढ़ती है। परिणामस्वरूप इसका पशुओं और भूमि दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
यह स्थिति DWGS को पशु आहार नहीं, बल्कि जोखिम भरा अपशिष्ट बनाती है।

पशु आहार बताना क्यों खतरनाक नैरेटिव है?

DWGS को पशु आहार बताने से कंपनियों को ZLD उल्लंघन से बचने का मौका मिलता है।
अपशिष्ट निपटान को “उपयोग” का नाम दिया जाता है जिससे
वास्तविक पर्यावरणीय खतरा दब जाता है।

“DWGS कोई सामान्य उप-उत्पाद नहीं, बल्कि उच्च नमी और उच्च प्रदूषण क्षमता वाला औद्योगिक अपशिष्ट है। जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस पर आपत्ति जताई है और ZLD लागू है, तब इसे पशु आहार के रूप में खिलाना न केवल गलत, बल्कि खतरनाक भी है।”

प्रशासन की लगातार अनदेखी से जनता हैरान

इस अपषिष्ट के खिलाफ द इंडिया स्पीक्स लगातार खबरें प्रकाशित कर रहा है जिसमें कई बार पीसीबी व स्थानीय प्रशासन ने जांचे की है लेकिन शराब कम्पनी एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज लिमिटेड के अपशिष्ट से प्राप्त करोड़ों के मुनाफे की पट्टी प्रशासन की आंखों पर बंधे होने के कारण उन्हें ऐसी कोई गतिविधि ही नहीं दिखती।
जबकि शराब कम्पनी के अपशिष्ट की गाड़िया खुलेआम सड़को पर घूम रही है। शराब कम्पनी के पीछे हाइवे पर ही इसका सबसे बड़ा अड्डा संचालित होता है जहां बड़े बड़े ट्रक खड़े रहते है लेकिन हैरानी तब होती है जब स्थानीय प्रशासन द इंडिया स्पीक्स को बाइट में कहता है कि उन्हें ऐसी कोई गतिविधि ही नहीं दिखी।
अब यह बात हास्यास्पद ही है कि तहसील कार्यालय के नजदीक एक और अड्डा संचालित होता है जहां इस खतरनाक अपशिष्ट की गाड़िया छोटे वाहनों में इसे लोड करके पशुपालको तक इस अपशिष्ट को पहुंचा रही है।

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