जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले बड़ा ऐलान, बोले- CJP से जुड़े युवा साफ दिल के और देशप्रेमी हैं
नई दिल्ली। The India Speaks Desk
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के लिए देशभर में पहचान रखने वाले सोनम वांगचुक ने बड़ा बयान देकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। अपने आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा है कि यदि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को भारत पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया जाता है, तो वे इसके विरोध में 42 दिनों के अनशन पर बैठेंगे।
सोनम वांगचुक का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर देशभर के युवाओं की नजर दिल्ली पर टिकी हुई है और अभिजीत दीपके की भारत वापसी को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं।
“इन युवाओं से मेरी बातचीत हुई है”
वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने बताया कि उनकी अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कई युवाओं से बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं से उनका संवाद हुआ, वे देश और समाज के मुद्दों को लेकर गंभीर हैं।
“मेरी अभिजीत दीपके और CJP से जुड़े युवाओं से बातचीत हुई है। ये युवा बहुत साफ दिल के हैं और देशप्रेमी हैं।”
वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार सभी नागरिकों को है।
गिरफ्तारी हुई तो शुरू होगा 42 दिन का अनशन
अपने वीडियो में सोनम वांगचुक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अभिजीत दीपके को एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार किया जाता है, तो वे 42 दिनों के अनशन पर बैठेंगे।
“अगर अभिजीत दीपके को एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया जाता है तो मैं 42 दिन का अनशन करूंगा।”
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन के रूप में देख रहे हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे आंदोलन को मिला अब तक का सबसे बड़ा नैतिक समर्थन मान रहे हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर देशभर की नजर
कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित प्रस्तावित प्रदर्शन पहले ही राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुआ यह अभियान सोशल मीडिया पर लाखों लोगों तक पहुंच चुका है।
अभिजीत दीपके की भारत वापसी, दिल्ली पुलिस की अनुमति को लेकर स्थिति और अब सोनम वांगचुक के अनशन वाले ऐलान ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चित बना दिया है।
बढ़ सकता है आंदोलन का दायरा
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और सार्वजनिक हस्तियां इस आंदोलन के समर्थन में खुलकर सामने आती हैं, तो यह केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस का रूप ले सकता है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि दिल्ली में होने वाले घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और प्रशासन का रुख क्या रहता है।












