बढ़ते यातायात के बीच शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल, चौराहों पर बसों के ठहराव पर लगे रोक
बड़वाह।(सुनील परिहार)
शहर में यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था अब भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। बड़वाहवासी अब चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल, सड़क के बीच पक्के डिवाइडर, व्यवस्थित पार्किंग और बसों को चौराहों पर रोकने के बजाय बस स्टैंड तक भेजने की मांग कर रहे हैं।
शहर के प्रमुख चौराहों पर बसों के रुकने से सड़क पर वाहनों की रफ्तार थम जाती है और देखते ही देखते जाम की स्थिति बन जाती है। ऐसे में सवाल भी सीधा है—बस स्टैंड आखिर किस दिन काम आएगा?
दूसरी ओर पार्किंग की समस्या भी कम नहीं है। बाजार क्षेत्र में पार्किंग के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से वाहन सड़क किनारे खड़े होते हैं। अब सवाल यह है कि “पार्किंग की जगह नहीं होगी तो वाहन चालक गाड़ी आखिर हवा में तो खड़ी नहीं करेगा!”
बैठक में बात हुई, सिग्नल आज तक नहीं आया!
पूर्व में सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद आयोजित बैठक में शहर में ट्रैफिक सिग्नल लगाने की बात सामने आई थी। लेकिन समय बीतता गया और सिग्नल की बात शायद फाइलों के ट्रैफिक में ही कहीं अटक गई।
बड़वाहवासियों का कहना है कि हादसे के बाद व्यवस्था सुधारने की बात सिर्फ बैठक तक सीमित न रहे। शहर के बढ़ते यातायात को देखते हुए प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल और सड़क के बीच मजबूत पक्के डिवाइडर की व्यवस्था जरूरी है।
जाम से निजात चाहिए तो व्यवस्था भी चाहिए
शहर में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए अब ट्रैफिक प्लान की जरूरत महसूस हो रही है। प्रमुख चौराहों पर बसों के अनावश्यक ठहराव पर रोक, बसों को बस स्टैंड में भेजना, व्यवस्थित पार्किंग जोन बनाना और यातायात नियंत्रण के लिए सिग्नल लगाना—इन कदमों से शहर को रोज-रोज के जाम से काफी राहत मिल सकती है।
अब देखना यह है कि ट्रैफिक सिग्नल की लाल-हरी बत्ती कब जलती है या फिर बड़वाह की जनता जाम में खड़ी होकर उसी ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार करती रहेगी!












