इंदौर/उज्जैन। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने 2028 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी का फोकस खासतौर पर मालवा-निमाड़ पर है, जहां कुल 66 विधानसभा सीटें हैं और 2023 के चुनाव में भाजपा ने इनमें से 47 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
कांग्रेस अब जिला संगठन से आगे बढ़कर ब्लॉक और मंडल स्तर के पदाधिकारियों को सक्रिय करने की दिशा में काम कर रही है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार नवरात्र के बाद उज्जैन में ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों के लिए बड़ा संगठनात्मक प्रशिक्षण शिविर प्रस्तावित है।
71 जिला समितियों में से 45 में प्रशिक्षण पूरा
कांग्रेस के मध्यप्रदेश संगठन प्रभारी संजय कामले के अनुसार पार्टी का वैचारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश की 71 जिला समितियों में से 45 में पूरा हो चुका है। प्रशिक्षण में संविधान, संगठनात्मक कामकाज, जमीनी स्तर पर जनसंपर्क और वैचारिक विषयों को शामिल किया गया है।
पार्टी ने संगठन की निगरानी के लिए ‘कनेक्ट सेंटर’ जैसी व्यवस्था भी विकसित की है। इसके जरिए जिला और निचले स्तर के संगठन की गतिविधियों पर नजर रखने की कोशिश की जा रही है।
निष्क्रिय पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी
संगठन मजबूत करने की कवायद में कांग्रेस ने प्रदर्शन को भी आधार बनाने की बात सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी ने कुछ ऐसे जिलाध्यक्षों को चिन्हित किया है जिनका प्रदर्शन अपेक्षित नहीं रहा और करीब सात जिलाध्यक्षों को बदले जाने की तैयारी है।
कांग्रेस ने जिला समितियों में पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व भी बढ़ाया है। रिपोर्ट के अनुसार यह हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जबकि पहले यह 40 प्रतिशत से कम थी।
इंदौर के बाद उज्जैन पर फोकस
कांग्रेस के संगठनात्मक अभियान में इंदौर के बाद उज्जैन को भी महत्वपूर्ण केंद्र बनाया जा रहा है। राहुल गांधी का 19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम हुआ था। अब उज्जैन में प्रस्तावित संगठनात्मक शिविर को मालवा क्षेत्र में ब्लॉक और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
मालवा-निमाड़ में कांग्रेस के सामने चुनौती बड़ी है। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने क्षेत्र की 66 में से 47 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस 17 सीटों पर रही और एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के खाते में गई।
अब कांग्रेस का संगठनात्मक पुनर्गठन कितना प्रभावी रहता है, इसका पहला बड़ा परीक्षण आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में होगा। पार्टी के भीतर इसे 2028 विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी नेटवर्क की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।









