बड़वाह। पशु आहार के रूप में इस्तेमाल होने वाले डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्यूबल्स यानी DDGS और इसके गीले रूप DWGS को लेकर बड़वाह में लंबे समय से उठ रहे सवाल अब सिर्फ स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रह जाते। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पशु आहार में पाए जाने वाले mycotoxins, खासकर Aflatoxin B1 (AFB1) को लेकर वैज्ञानिक शोध लगातार खाद्य और पशु स्वास्थ्य की चिंता सामने ला रहे हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि बड़वाह क्षेत्र में बड़ी मात्रा में परिवहन किए जा रहे DWGS/DDGS की गुणवत्ता, नमी, भंडारण और mycotoxin contamination की स्वतंत्र जांच आखिर कितनी नियमित और पारदर्शी है?
चीन में हुआ बड़ा अध्ययन, 23,003 पशुआहार नमूनों की जांच
जिस वैज्ञानिक अध्ययन ने इस विषय को गंभीरता से देखने की जरूरत बताई है, वह चीन में वर्ष 2021 से 2024 के दौरान एकत्र किए गए 23,003 पशु आहार नमूनों के विश्लेषण पर आधारित था।
यह अध्ययन शोधकर्ताओं की एक टीम ने किया और इसके निष्कर्ष 2025 में प्रकाशित हुए। शोध में पशु आहार की विभिन्न श्रेणियों के नमूनों में Aflatoxin B1, Deoxynivalenol (DON) और Zearalenone (ZEN) जैसे mycotoxins की मौजूदगी की जांच की गई।
इस अध्ययन में कुल 23,003 नमूनों में से 17,489 feedstuff samples थे। इनमें 1,558 DDGS samples भी शामिल किए गए थे।
यह अध्ययन इतना जरूर बताता है कि DDGS जैसे feed ingredients में mycotoxin contamination की निगरानी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
Aflatoxin B1 से दूध तक पहुंच सकता है जोखिम
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के अनुसार mycotoxins कुछ फफूंदों द्वारा पैदा किए जाने वाले प्राकृतिक विषैले पदार्थ हैं और ये मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं।
WHO के अनुसार aflatoxins सबसे विषैले mycotoxins में शामिल हैं और इनके लंबे समय तक संपर्क से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात पशुपालन और डेयरी क्षेत्र से जुड़ी है।
यदि पशु को aflatoxin से दूषित feed मिलता है तो Aflatoxin B1 का metabolite Aflatoxin M1 (AFM1) दूध में पहुंच सकता है। इसी कारण पशु आहार की गुणवत्ता केवल पशु स्वास्थ्य का विषय नहीं रह जाती, बल्कि यह दूध और अंततः मानव खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ जाती है।
यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पशु को क्या खिलाया जा रहा है।
सवाल यह भी है कि उस feed के जरिए उपभोक्ता तक क्या पहुंच सकता है?
बड़वाह में DWGS परिवहन पर फिर क्यों उठे सवाल?
बड़वाह के खोड़़ी क्षेत्र में Associated Alcohols & Breweries Limited (AABL) से निकलने वाले DWGS के परिवहन को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जाता रहा है कि यहां से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में DWGS बाहर भेजा जाता है। क्षेत्र में इसके परिवहन और खरीद-बिक्री को लेकर कई बार शिकायतें और जांच की मांग भी सामने आती रही हैं।
विवाद का मुख्य बिंदु यही है कि गीले DWGS और सूखे DDGS में अंतर क्या है और परिवहन के दौरान वास्तव में कौन-सा material भेजा जा रहा है?
यदि किसी इकाई की पर्यावरणीय सहमति अथवा संचालन संबंधी शर्तों में किसी विशेष रूप में processing, drying, handling या disposal की व्यवस्था निर्धारित है, तो उसका पालन होना चाहिए। ऐसे में केवल कागजी विवरण पर्याप्त नहीं है।
सड़क पर जा रहे माल की स्वतंत्र sampling और laboratory testing ही स्थिति को स्पष्ट कर सकती है।
सवाल सिर्फ DWGS का नहीं, जांच व्यवस्था का है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी ट्रक में मौजूद सामग्री को देखकर या दस्तावेज में लिखे नाम के आधार पर उसे DDGS मान लिया जाए या उसकी वास्तविक नमी और गुणवत्ता की जांच भी की जाए?
यदि किसी खेप को DDGS बताया जा रहा है, तो उसकी जांच क्यों न हो?
विशेष रूप से तब, जब feed safety पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध लगातार mycotoxin contamination की निगरानी की आवश्यकता बता रहे हैं।
“कागज पर DDGS, जमीन पर DWGS?”—यह सवाल जांच से ही सुलझेगा
बड़वाह में सामने आने वाली शिकायतों का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि स्वतंत्र और पारदर्शी sampling से होना चाहिए।
प्रशासन यदि वास्तव में स्थिति स्पष्ट करना चाहता है तो अलग-अलग स्थानों से अचानक sample लिए जा सकते हैं—उत्पादन स्थल, loading point, transport vehicle और receiving premises से।
इन samples को किसी स्वतंत्र मान्यता प्राप्त laboratory में भेजकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
तब यह स्पष्ट हो सकेगा कि परिवहन की जा रही सामग्री वास्तव में क्या है और उसमें निर्धारित feed-safety parameters क्या हैं।
प्रशासन से 10 सीधे सवाल
- बड़वाह क्षेत्र में परिवहन किए जा रहे DWGS/DDGS के कितने samples पिछले एक वर्ष में लिए गए?
- क्या इन samples की स्वतंत्र laboratory में जांच हुई?
- क्या Aflatoxin B1 और अन्य mycotoxins की जांच कराई गई?
- यदि जांच हुई तो laboratory reports सार्वजनिक क्यों नहीं की गईं?
- गीले DWGS और सूखे DDGS की पहचान के लिए कौन-सा मानक अपनाया जा रहा है?
- क्या transport के दौरान moisture content की जांच की जाती है?
- क्या प्रत्येक बड़ी खेप के साथ quality certificate या laboratory report उपलब्ध रहती है?
- संबंधित इकाई की environmental consent में feed material के handling और transportation को लेकर क्या शर्तें हैं?
- यदि शिकायतकर्ता द्वारा DWGS परिवहन के फोटो/वीडियो प्रस्तुत किए गए हैं तो उनका स्वतंत्र सत्यापन क्यों नहीं किया गया?
- यदि material निर्धारित मानकों के अनुरूप है तो उसकी स्वतंत्र जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने में प्रशासन को आपत्ति क्यों होनी चाहिए?
यह सिर्फ बड़वाह का मामला नहीं
पशु आहार की गुणवत्ता का मामला किसी एक फैक्ट्री, किसी एक कारोबारी या किसी एक जिले तक सीमित नहीं है।
जहां feed chain में DDGS या दूसरे agro-industrial by-products का इस्तेमाल हो रहा है, वहां quality testing और traceability जरूरी है।
विशेष रूप से डेयरी क्षेत्र में इसका महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि पशु आहार की गुणवत्ता अंततः दूध की गुणवत्ता से जुड़ सकती है।
इसलिए बड़वाह में उठ रहे सवालों का सबसे बेहतर जवाब यही होगा कि प्रशासन दावे नहीं, आंकड़े और स्वतंत्र laboratory reports सामने रखे।
यदि DWGS पूरी तरह मानकों के अनुरूप है तो जांच से यह बात और मजबूत होगी। और यदि कहीं नियमों, processing या quality में कमी है तो उसे भी समय रहते रोका जा सकेगा।
सवाल किसी उद्योग को बंद कराने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि पशु को सुरक्षित feed मिले, किसान को सही सामग्री मिले और उपभोक्ता तक सुरक्षित दूध पहुंचे।
और जब वैज्ञानिक शोध 23,003 पशु आहार नमूनों के स्तर पर mycotoxins की निगरानी की जरूरत सामने रखता है, तब बड़वाह में बड़े पैमाने पर DWGS/DDGS के परिवहन की स्वतंत्र जांच की मांग को नजरअंदाज करना आसान नहीं होना चाहिए।









