खरगोन। मानसून की विदाई के साथ खरगोन जिले में बारिश का आंकड़ा औसत से करीब 10 प्रतिशत नीचे रह गया है। हालांकि जलाशयों में उपलब्ध पानी फिलहाल राहत दे रहा है। जिले के छोटे-बड़े जलाशयों में करीब 87 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। ऐसे में रबी सीजन की शुरुआत के लिए स्थिति फिलहाल संभली हुई दिखाई दे रही है, लेकिन गर्मी के महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर अभी से सवाल खड़े होने लगे हैं।
भू-अभिलेख विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में जिले में अब तक 759.46 मिमी बारिश दर्ज की गई है। जिले की वार्षिक औसत बारिश 828.04 मिमी है। यानी औसत के मुकाबले बारिश कम रही, हालांकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में दर्ज 749 मिमी बारिश की तुलना में इस बार आंकड़ा थोड़ा अधिक है।
87 प्रतिशत जलभराव से रबी को फिलहाल राहत
बारिश में कमी के बावजूद जिले के प्रमुख जलस्रोतों में पर्याप्त पानी जमा होने से रबी फसलों की सिंचाई को लेकर फिलहाल बड़ी परेशानी की स्थिति नहीं बताई जा रही है। देजला देवाड़ा और अपरवेदा बांध सहित बामंदी क्षेत्र का साटक बांध भी लंबे समय से ओवरफ्लो होने की स्थिति में बताए गए हैं।
इसी जल उपलब्धता को देखते हुए कृषि विभाग ने रबी सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले में इस बार करीब 3.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है।
पानी की उपलब्धता और किसानों के रुझान के बीच फसल पैटर्न में भी बदलाव की संभावना है। गेहूं का रकबा करीब 23 हजार हेक्टेयर घटने, जबकि कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाले चने का रकबा करीब 20 हजार हेक्टेयर बढ़ने का अनुमान है।
असली चुनौती गर्मी में सामने आ सकती है
जलाशयों में मौजूदा पानी रबी के लिए राहत दे रहा है, लेकिन बारिश की कमी का असर गर्मी में ज्यादा दिखाई दे सकता है। खासकर जिले के दूरस्थ पहाड़ी और आदिवासी इलाकों में भूजल स्तर नीचे जाने की स्थिति में पेयजल संकट बढ़ने की आशंका जताई गई है।
यानी फिलहाल तस्वीर यह है कि रबी की शुरुआत के लिए जलाशयों में पर्याप्त पानी है, लेकिन गर्मी तक इसी पानी को बचाए रखना चुनौती होगी। ऐसे में जलाशयों में मौजूद 87 प्रतिशत पानी केवल राहत का आंकड़ा है या अगले मौसम के लिए पर्याप्त सुरक्षा—इसका जवाब आने वाले महीनों में पानी के उपयोग और भूजल की स्थिति से तय होगा।










