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बड़वाह (खरगोन)। लोकेश कोचले | The India Speaks

​बड़वाह की सड़कें अब केवल मार्ग नहीं रहीं, वे युवाओं और बुजुर्गों के लिए ‘मौत का जाल’ बन चुकी हैं। पिछले एक महीने में सड़क हादसों की भयावह श्रृंखला ने पूरे शहर को दहला दिया है, जिसमें चार युवा और एक बुजुर्ग समेत पाँच लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इन मौतों का कारण केवल तेज रफ्तार नहीं, बल्कि प्रशासन की घोर निष्क्रियता और लापरवाही है, जिसने इन सड़कों को जानलेवा बना दिया है।

​मरने वालों में युवा विनीत शर्मा, मोहसिन अली, शिवम यादव, और गोविंद पिता गेंदालाल शामिल हैं, जिनके परिवारों में अब सिर्फ मातम बचा है।

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​दुर्घटना नहीं, यह प्रशासनिक लापरवाही की ‘हत्या’ है!

​इन पाँच मौतों को सिर्फ सड़क दुर्घटना कहना सच्चाई से मुँह मोड़ना है। ये सीधे तौर पर प्रशासनिक चूक और जवाबदेही की कमी का परिणाम हैं:

​1. प्रशासनिक वाहन बना काल: बस स्टैंड पर बुजुर्ग को कुचला

​बड़वाह बस स्टैंड पर सबसे चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहाँ पुलिस का डायल 112 वाहन ही काल बन गया। लापरवाही से चलाए जा रहे इस सरकारी वाहन ने बुजुर्ग काशीराम को कुचल दिया, जिनकी मौके पर ही मौत हो गई। क्या प्रशासन के अपने वाहन चालकों पर भी कोई नियंत्रण नहीं है? यह घटना दिखाती है कि जहाँ सुरक्षा की उम्मीद है, वहाँ भी जीवन असुरक्षित है।

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​2. राखड़ ट्रकों का आतंक: दो युवक जलकर खाक

इंदौर-इच्छापुर रोड पर राखड़ (फ्लाई ऐश) से भरे अनियंत्रित ट्रक ने मोटरसाइकिल सवार विनीत शर्मा और मोहसिन अली को टक्कर मारी, जिसके बाद ट्रक में आग लग गई। दोनों युवक ट्रक के नीचे फँसकर जिंदा जल गए। स्थानीय लोग बताते हैं कि नर्मदा पुल से भारी वाहनों पर लगी रोक हटने के बाद से ही ये तेज रफ्तार राखड़ के ट्रक बेखौफ होकर घूम रहे हैं। क्या मुनाफ़े के लिए प्रशासन ने नागरिकों की जान दाँव पर लगा दी?

​3. गड्ढों वाली सड़क पर मौत: शिवम यादव की चली गई जान

महेश्वर रोड की टूटी-फूटी हालत, जानलेवा गड्ढों और प्रशासन की वर्षों की अनदेखी ने युवा शिवम यादव की जान ले ली। स्थानीय लोग सड़क की मरम्मत के लिए चीखते रहे, लेकिन प्रशासन मौन रहा। क्या सड़क पर एक जान जाने के बाद ही अधिकारी जागेंगे?

​4. अनियंत्रित यातायात: गोविंद भी बने शिकार

​मोरटक्का क्षेत्र में बाइक और तीन-पहिया रिक्शा की टक्कर में गोविंद पिता गेंदालाल की मौत हो गई और छह लोग घायल हुए। यह घटना अनियंत्रित ओवरस्पीडिंग और भारी वाहनों पर कोई लगाम न होने का सबूत है।

नागरिकों का आक्रोश: “मौन प्रशासन को सड़क पर उतारेंगे”

​लगातार होती मौतों पर बड़वाह के नागरिक अब सवाल पूछ रहे हैं

“हमारे युवा रोज़ मर रहे हैं, लेकिन अधिकारी सिर्फ कागज़ों पर कार्रवाई कर रहे हैं। ये केवल हादसे नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा उपायों की कमी का परिणाम हैं।

नगर पालिका अध्यक्ष ने भारी वाहनों के संचालन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की

​इन दर्दनाक घटनाओं पर जहाँ उच्च प्रशासन चुप्पी साधे हुए है, वहीं नगर पालिका परिषद, बड़वाह के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने अब जिलाधिकारी को पत्र लिखकर भारी वाहनों के संचालन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

​अध्यक्ष ने मांग की है कि यदि भारी वाहनों की आवाजाही अति आवश्यक है, तो उन्हें केवल रात्रि 10 बजे से प्रातः 06 बजे तक ही संचालित करने की अनुमति दी जाए।

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