नाइजीरिया में 16 वर्षीय नाबालिग के चुनाव लड़ने के आरोप ने सोशल मीडिया पर छेड़ी बहस, वायरल हुआ पूरा मामला
अबुजा (नाइजीरिया)। The India Speaks Desk
अफ्रीकी देश नाइजीरिया में एक ऐसा राजनीतिक मामला सामने आया जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। यहां Mahmud Sadis Buba नाम का एक नाबालिग खुद को 30 साल का बताकर संसद (House of Representatives) का चुनाव लड़ने पहुंच गया, लेकिन बाद में उसकी उम्र को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया।
Mahmud Sadis Buba, जिन्हें स्थानीय लोग “Abin Al-Ajabin Zazzau” के नाम से भी जानते हैं, नाइजीरिया की सत्ताधारी पार्टी APC (All Progressives Congress) से चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि वे 30 साल के हैं और dwarfism (बौनापन) की वजह से छोटे बच्चे जैसे दिखाई देते हैं।
वीडियो वायरल होते ही उठे सवाल
मामला तब चर्चा में आया जब पार्टी स्क्रीनिंग के दौरान उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में वे आत्मविश्वास के साथ चुनाव लड़ने की बात करते दिखाई दिए। कई लोग उनके आत्मविश्वास की तारीफ कर रहे थे, तो कई यूजर्स उनकी उम्र को लेकर सवाल उठाने लगे।
दस्तावेज वायरल हुए तो मच गया हड़कंप
कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर कथित पासपोर्ट, National Identity Number (NIN) और स्कूल रिकॉर्ड वायरल होने लगे। इन दस्तावेजों में जन्म वर्ष 2010 बताया गया, जिसके आधार पर दावा किया गया कि उनकी असली उम्र 15–16 साल है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि वह हाल ही में स्कूल यूनिफॉर्म में दिखाई दिए थे और सेकेंडरी स्कूल के छात्र थे। इसके बाद पूरे नाइजीरिया में यह मामला राजनीतिक विवाद बन गया।
पार्टी पर भी उठे सवाल
विवाद बढ़ने के बाद सवाल यह भी उठने लगे कि अगर उम्मीदवार नाबालिग था तो वह पार्टी की स्क्रीनिंग प्रक्रिया पार कैसे कर गया? आलोचकों ने APC की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए, जबकि समर्थकों ने इसे राजनीतिक साजिश बताया।
आखिरकार वापस लेनी पड़ी दावेदारी
लगातार विवाद और उम्र फर्जीवाड़े के आरोपों के बीच Mahmud Sadis Buba ने 16 मई 2026 को चुनावी दावेदारी वापस लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला पार्टी एकता और आंतरिक सहमति के कारण लिया गया है। हालांकि सोशल मीडिया पर अधिकांश लोग इसे उम्र विवाद से जोड़कर देख रहे हैं।
दुनिया भर में वायरल हुआ मामला
यह अजीबोगरीब मामला अब सिर्फ नाइजीरिया तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर लोग इसे “दुनिया की सबसे अनोखी चुनावी कहानी” कह रहे हैं। कई लोगों ने इसे राजनीति, उम्र सत्यापन और सोशल मीडिया ट्रोलिंग का विचित्र मिश्रण बताया।











