करोड़ों की योजना का लाभ जनता तक नहीं पहुंचा, भवन तैयार लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने नहीं संभाली जिम्मेदारी
बड़वाह। लोकेश कोचले| The India Speaks
प्रदेश सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में आम नागरिकों को उनके घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक योजना बड़वाह में अधिकारियों की उदासीनता का शिकार होती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि नगरपालिका द्वारा भवन निर्माण कार्य पूरा किए जाने के दो वर्ष से अधिक समय बीत चुके हैं, लेकिन आज तक स्वास्थ्य विभाग ने भवन का हस्तांतरण नहीं लिया है। नतीजतन क्लीनिक शुरू नहीं हो सका और लाखों रुपये की लागत से बना भवन ताले में कैद होकर रह गया है।
नगरपालिका ने लिखे कई पत्र, फिर भी नहीं जागा स्वास्थ्य विभाग
जानकारी के अनुसार नगरपालिका बड़वाह द्वारा जिला स्वास्थ्य विभाग को कई बार पत्र लिखकर भवन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया गया। स्थानीय स्तर पर भी यह मुद्दा बार-बार उठाया जाता रहा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। सवाल यह है कि जब भवन पूरी तरह तैयार है तो आखिर उसे शुरू करने में बाधा क्या है?
जनता पूछ रही – आखिर जिम्मेदार कौन?
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि क्लीनिक शुरू हो जाता तो उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और सामान्य मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं मिल सकती थीं। लेकिन दो साल से भवन पर लटका ताला सरकारी व्यवस्था की सुस्ती की कहानी बयां कर रहा है।
लोगों का यह भी कहना है कि लंबे समय तक भवन खाली पड़े रहने से उसके असामाजिक तत्वों के अड्डे में बदलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते इसका उपयोग शुरू नहीं किया गया तो भवन की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।
आश्वासन मिले, समाधान नहीं
बताया जाता है कि जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मोहनसिंह सिसोदिया द्वारा पूर्व में क्लीनिक शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि जमीनी स्तर पर अब तक कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि आखिर प्रशासनिक स्तर पर फाइल किस टेबल पर अटकी हुई है।
मिलने वाली थीं ये स्वास्थ्य सुविधाएं
मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के माध्यम से क्षेत्रवासियों को सामान्य ओपीडी सेवाएं, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, टीकाकरण, बुजुर्गों की स्वास्थ्य सेवाएं, हीमोग्लोबिन जांच, मलेरिया एवं टायफाइड टेस्ट, रक्तचाप और मधुमेह जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी थीं। इसके अलावा विभिन्न बीमारियों की रैपिड टेस्ट किट के जरिए जांच और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी प्रस्तावित थी।
बड़ा सवाल
जब भवन तैयार है, संसाधन उपलब्ध हैं और योजना का उद्देश्य भी स्पष्ट है, तो फिर दो वर्षों से जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं से क्यों वंचित रखा जा रहा है? क्या स्वास्थ्य विभाग इस मामले में जवाबदेही तय करेगा या फिर यह भवन भी अन्य अधूरी सरकारी योजनाओं की तरह केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा?












