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विश्वसनीय और समयबद्ध डेटा से मजबूत होगा राजकोषीय विकेंद्रीकरण, पंचायतों को मिलेगा बेहतर वित्तीय आधार

नई दिल्ली। The India Speaks Desk

केंद्र सरकार ने देश में राजकोषीय विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य वित्त आयोगों (SFCs) के लिए आवश्यक डेटासेट से संबंधित समिति की रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में जारी की।

कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी, संयुक्त सचिव मुक्ता शेखर सहित विभिन्न शोध संस्थानों और नीति निकायों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बेहतर डेटा से बेहतर शासन संभव

मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि नागरिक शासन का अनुभव पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट और आंगनवाड़ी जैसी मूलभूत सेवाओं के माध्यम से करते हैं। इसलिए पंचायतों की भूमिका प्रभावी शासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

“राजकोषीय विकेंद्रीकरण का उद्देश्य शासन को लोगों के और करीब लाना है। राज्य वित्त आयोग तभी प्रभावी सिफारिशें कर सकते हैं जब उनके पास विश्वसनीय, सामयिक और विस्तृत डेटा उपलब्ध हो।”

उन्होंने कहा कि संसाधनों के आवंटन संबंधी निर्णयों की गुणवत्ता सीधे तौर पर उपलब्ध आंकड़ों और उनके विश्लेषण की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।

सीएजी से प्रदर्शन मूल्यांकन कराने की सिफारिश

डॉ. नागेश्वरन ने रिपोर्ट की एक अहम सिफारिश का उल्लेख करते हुए बताया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से राज्यों में 73वें संविधान संशोधन के क्रियान्वयन का प्रदर्शन मूल्यांकन कराने का सुझाव दिया गया है। इससे पंचायतों को दिए गए वित्तीय, प्रशासनिक और कार्यात्मक अधिकारों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।

पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने राज्य वित्त आयोगों और केंद्रीय वित्त आयोगों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिफारिशों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुधारने के लिए सटीक और सुलभ डेटा आवश्यक है।

उन्होंने जानकारी दी कि पंचायत उन्नति सूचकांक को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में स्वर्ण पुरस्कार के लिए चुना गया है और इस वर्ष घोषित 16 राष्ट्रीय पुरस्कारों में से चार पंचायत संबंधी पहलों को प्राप्त हुए हैं।

शहरीकरण के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव

विवेक भारद्वाज ने बताया कि सोलहवें वित्त आयोग ने तेजी से बढ़ रहे अर्ध-शहरी क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 10,000 करोड़ रुपये के “शहरीकरण प्रीमियम” का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा पंचायतों के लिए 87,000 करोड़ रुपये के प्रदर्शन आधारित अनुदान का भी प्रस्ताव किया गया है।

इन अनुदानों को स्थानीय निकायों के स्वयं के राजस्व में कम से कम 2.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि से जोड़ा जाएगा।

रिपोर्ट में क्या हैं प्रमुख सिफारिशें

रिपोर्ट में पंचायतों और राज्य वित्त आयोगों के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • पंचायत स्तर पर राजकोषीय डेटाबेस का निर्माण
  • पंचायत उन्नति सूचकांक के संकेतकों का वर्गीकरण
  • राज्यों में समर्पित राज्य वित्त आयोग प्रकोष्ठ की स्थापना
  • लेखांकन प्रणालियों का मानकीकरण
  • राज्य वित्त आयोगों के लिए समान रिपोर्टिंग ढांचा
  • व्यापक डेटा पुस्तिकाओं का प्रकाशन
  • राज्य वित्त आयोगों के लिए नियमावली तैयार करना

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में मिलेगी मदद

रिपोर्ट का उद्देश्य स्थानीय सार्वजनिक वित्त व्यवस्था को मजबूत करना और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को अधिक प्रभावी बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी और ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

संविधान के अनुच्छेद 243-I के तहत गठित राज्य वित्त आयोगों को पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करने और वित्तीय विकेंद्रीकरण के सिद्धांतों की सिफारिश करने का दायित्व दिया गया है। नवंबर 2024 में आयोजित वित्त आयोगों के सम्मेलन में मजबूत डेटा इकोसिस्टम की आवश्यकता को रेखांकित किए जाने के बाद इस समिति का गठन किया गया था।

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