पिछले साल शिवम की जान लेने वाले गड्ढों पर फिर खानापूर्ति… आखिर स्थायी समाधान कब?
बड़वाह | (सुनील परिहार)- महेश्वर रोड पर गड्ढों का साम्राज्य एक बार फिर बारिश के साथ लौट आया है। हर साल की तरह इस बार भी जिम्मेदार विभाग “मेकअप पॉलिसी” पर उतर आया है। गड्ढों पर कुछ फावड़े मुरम, थोड़ा-सा डामर और फोटो सेशन… फिर सब कुछ ठीक होने का दावा!
लेकिन सवाल वही है—क्या सड़कें सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए बनती हैं या लोगों की जान बचाने के लिए?
याद दिला दें कि पिछले वर्ष इन्हीं जानलेवा गड्ढों ने युवा शिवम की जिंदगी छीन ली थी। उस दर्दनाक हादसे के बाद सड़क खून से लाल हो गई थी। जिम्मेदारों ने बड़े-बड़े दावे किए, जांच की बातें हुईं, स्थायी समाधान के आश्वासन भी मिले, लेकिन समय के साथ सब कुछ फाइलों में दफन हो गया।
अब फिर वही कहानी दोहराई जा रही है। बारिश शुरू होते ही गड्ढों पर अस्थायी पैबंद लगाए जा रहे हैं। पहली तेज बारिश के बाद ये पैबंद बह जाएंगे और सड़क फिर मौत का जाल बन जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल लाखों रुपये अस्थायी मरम्मत पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन सड़क का गुणवत्तापूर्ण और स्थायी पुनर्निर्माण नहीं किया जाता। आखिर जनता के टैक्स का पैसा कब तक सिर्फ “गड्ढों के मेकअप” पर खर्च होता रहेगा?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि सड़क पर उचित जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था नहीं होगी, तो नई सड़क भी कुछ ही महीनों में उखड़ जाएगी। इसलिए केवल गड्ढे भरना समाधान नहीं, बल्कि मजबूत सड़क निर्माण के साथ स्थायी जल निकासी व्यवस्था भी जरूरी है।
अब प्रशासन और संबंधित विभाग को यह तय करना होगा कि वे हर साल की खानापूर्ति से आगे बढ़कर स्थायी समाधान करेंगे या फिर किसी और शिवम की जान जाने का इंतजार करेंगे।
जनता का सीधा सवाल…
“क्या सड़कें बरसात में गड्ढे भरने के लिए बनती हैं, या सुरक्षित सफर के लिए?”











