चुनाव आयोग से राहत नहीं मिलने पर न्यायिक लड़ाई तेज, भाजपा बोली- कांग्रेस अपनी गलती छिपा रही
भोपाल। लोकेश कोचले। The India Speaks Desk
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला अब चुनाव आयोग से निकलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने नामांकन रद्द करने के फैसले को असंवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जबकि भाजपा इसे कांग्रेस की प्रक्रियागत गलती बता रही है।
राज्यसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ यह विवाद अब राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि एक मजबूत विपक्षी उम्मीदवार को चुनावी मैदान से बाहर करने के लिए तकनीकी आधारों का इस्तेमाल किया गया, जबकि भाजपा का कहना है कि नामांकन पत्र में आवश्यक जानकारी छिपाने के कारण यह कार्रवाई हुई।
बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन बहाल करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने आयोग के समक्ष तर्क रखा कि नटराजन के खिलाफ कोई लंबित आपराधिक मामला नहीं है और रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला गलत व्याख्या पर आधारित है।
कांग्रेस का दावा है कि चुनाव आयोग के पास रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले की समीक्षा करने और उसे पलटने की शक्ति है। पार्टी ने आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई शुरू
चुनाव आयोग से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला किया और मामले को न्यायिक चुनौती दी है। पार्टी का कहना है कि नामांकन रद्द करने की कार्रवाई न केवल कानून की गलत व्याख्या है बल्कि इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
मामले के विरोध में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भोपाल सहित कई जिलों में धरना और भूख हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटनाक्रम को “लोकतंत्र की हत्या” बताते हुए कहा कि पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी।
भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन भी किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की गई। 6
विवाद की जड़ क्या है?
भाजपा नेताओं द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति में आरोप लगाया गया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन दस्तावेजों में तेलंगाना से जुड़े एक मामले की जानकारी नहीं दी। इसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया। कांग्रेस का कहना है कि जिस मामले का हवाला दिया जा रहा है उसमें नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा लंबित नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब केवल एक उम्मीदवार के नामांकन तक सीमित नहीं रहा है। चुनाव आयोग की भूमिका, नामांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विपक्ष के चुनावी अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस शुरू हो गई है। यदि कांग्रेस को न्यायिक राहत नहीं मिलती है तो मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा की राह लगभग निर्विरोध हो सकती है।
अब पूरे मामले की निगाहें सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि न्यायालय या आयोग कांग्रेस की दलीलों को स्वीकार करता है तो राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित बदल सकता है। वहीं यदि नामांकन रद्द करने का फैसला बरकरार रहता है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा।












